अहिरवाल क्षेत्र, जिसमें रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और गुड़गांव के दक्षिणी हरियाणा जिले शामिल हैं। 1857 की क्रांति में राव तुला राम, राव गोपाल देव व राव किशन सिंह के नेतृत्व में नसीबपुर नारनौल के मैदान में अंग्रेजों से दो-दो हाथ करते हुए 5000 वीर अहीरों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया । पारंपरिक रूप से बड़ी संख्या में भारतीय सेना में सैनिकों का योगदान दिया है। इस क्षेत्र में अहीर रेजीमेंट के निर्माण के लिए सबसे अधिक शोर-शराबा देखा गया है, हालांकि अहीर की बड़ी आबादी वाले अन्य राज्यों में भी इसकी मांग उठाई गई है। 1962 में रेजांग ला की लड़ाई में हरियाणा के अहीर सैनिकों की बहादुरी की कहानी के बाद समुदाय को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था। कुमाऊं रेजीमेंट की 13वीं बटालियन के सी कंपनी के अधिकांश सैनिक चीनी हमले से लड़ते हुए मारे गए, लेकिन चुशुल के लिए दुश्मन की बढ़त को खत्म कर दिया था। समुदाय के सदस्यों ने लंबे समय से तर्क दिया है कि अहीर उनके नाम पर एक पूर्ण इन्फैंट्री रेजिमेंट के लायक हैं, न कि कुमाऊं रेजिमेंट में केवल दो बटालियन।
1962 में रेजांग ला की जंग में हरियाणा के जांबाज अहीर सैनिकों की बहादुरी की खबर मिलने के बाद अहीर सैनिक पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। आज भी उन 117 अहीरों के शौर्य और बलिदान को याद किया जाता है। उस समय कुमाऊं रेजिमेंट की 13वीं बटालियन की सी कंपनी के ज्यादातर सैनिक चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे लेकिन दुश्मन को आगे नहीं बढ़ने दिया। वे तमाम कोशिशों के बाद भी रेजांगला चौकी पर कब्जा नहीं कर पाए और चुशूल में आगे बढ़ने का उनका सपना चकनाचूर हो गया। 18 नवंबर 1962 की वो तारीख जब पूर्वी लद्दाख के 17 हजार फीट की ऊंचाई पर रेजांग ला में तैनात 13 कुमाऊं के अहीरों ने उन पर चीनी हमले का विरोध किया। 120 सैनिकों वाली कंपनी उनसे मुकाबला करती है, बहाजदुरी की ये गौरवगाथा सदा के लिए अमर हो गई। मारे गए 117 सैनिकों में से 114 अहीर थे, और केवल तीन गंभीर रूप से घायल हुए थे। मारे गए अहीर सैनिक हरियाणा के रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ बेल्ट के थे। जब सर्दी समाप्त हो गई और मृत सैनिकों के शव बरामद किए गए, तो कई लोग अपने हथियारों को खाइयों में पकड़े हुए पा
1971 के भारत पाक युद्ध में वीर अहीरों को 2 महावीर चक्र ,4 वीर चक्र व 9 सेना मेडल मिले थे!
जय हिंद! 🇮🇳
#अहीर_रेजिमेंट_हक़_है_हमारा #राव_लवकुश_यदुवंशी_क्षत्रिय_🚩